Menu

कसप : भावनाओं की गहराईयों में एक यात्रा

लेखक: The BookishmateJuly 8, 2024⭐⭐⭐⭐⭐ 4.8 / 5.0

कसप किताब की समीक्षा हिंदी में

This post may contain affiliate links which means I may receive a commission from purchases made through links. I only recommend books I have personally read. Thank you for supporting my website !


कसप
कसप

मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखा कालजयी उपन्यास “कसप”।आप कभी भी किसी लेखक या पाठक से ही कुछ हिंदी किताबों के नाम साझा करने को कहेंगे तो उनके नामों की श्रंखला में एक नाम कसप का भी मिलेगा। कसप इतनी ज्यादा प्रसिद्ध किताब है।किताब की बात करें तो ये एक कहानी है नायक और नायिका की।नायक बुद्धिमान है,पढ़ा लिखा,फिल्मों में काम करने वाला,कविता कहानियां लिखने वाला और उसका नाम बोले तो डी. डी. यानी देवदत्त तिवारी, पर नायिका के लिए वो फिर भी लाटा है लाटा।लाटा यानी मूर्ख।

नायिका है तो बड़ी खूबसूरत पर बेपरवाह। उसकी खूबसूरती की खबर भी उसे शहर वालों ने ही दी है । पढ़ाई लिखाई से नायिका का दूर दूर तक कोई रिश्ता नाता ही नहीं है।बड़ी मुश्किल से दसवीं पास हुई है। दरअसल नायिका तो नायिका थी ही नहीं वो सिर्फ बेबी थी, नायिका तो उसे परिस्थितियों और घर वालों ने बना दिया।

बेबी नाम के अनुसार ही काम भी करती।बड़ी खिलंदड़  प्रवित्ति की है बेबी।पर एक तरफ भले बेबी को खिलंदड़ प्रवित्ति का दिखाया गया हो पर वहीं पर दूसरी तरफ कसप में बेबी के किरदार का चित्रण बहुत मजबूत दिखाया गया है। नायिका भले ही हंसी – मजाक वाली हो लेकिन उसके अंदर अपनी बातों को लेकर स्थिरता है। बेबी ने जो सोचा है , जो ठाना है वो करके रहना है।

कसप की  कहानी आंचलिक भाषा कुमाऊनी में लिखी गई है। कसप का कुमाऊनी अर्थ है क्या जाने। कहानी की बात करें तो नायक और नायिका किसी शादी के जनवासे में मिलते है । नायक बहुत ही हास्यापद स्थिति में नायिका से मिलता है और यही से उनके हँसी मजाक, ताने – बाने की शुरुआत होती है। हालाँकि नायक बहुत जल्दी ही नायिका के प्यार में पड़ जाता है पर नायिका उसे तो मजा आ रही होती है नायक के हास्य कामों में।

शादी में एकत्रित बाकी सभी लोगों को नायक मात्र शिबौ शिबौ का पात्र लगता है (शिबौ शिबौ एक प्रकार का खेल है जिसमें कोई एक व्यक्ति अपने दुःख की दास्तान सुनाता है और बाकी सभी उसके दुःख के लिए शिबौ शिबौ यानि शिव शिव कहते है ।) नायिका हर सवाल का जवाब बहुत ही साधारण ढंग से देती है, जो असल में होती असाधारण होती है । 

शादी से वापस जाने के बाद नायक पत्र लिखता है नायिका के नाम । पर नायिका तो ढंग से पढ़ नहीं पाती इसीलिए नायिका मदद लेती है अपने पिता की। हालांकि डी.डी. पत्र में ऐसा कुछ नहीं लिखता था जो एक पिता को पढ़ने में संकोच हो बल्कि मन ही मन में इसी बहाने नायिका के कुछ पढ़ने पर उन्हें खुशी होती थी।

पर क्या यह पत्र का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा ? क्या डी.डी. के पत्र में पिता को अपनी पुत्री के लिए उसका प्रेम नहीं दिखेगा? और नायिका जिसे अभी तक इस खेल में मजा आ रही है क्या आगे भी वह ऐसी ही रहेगी या उसे भी नायक से प्रेम हो पाएगा? क्या नायिका भी कभी नायक के नाम पत्र लिख पाएगी ? ये सब ऐसे सवाल है जिनका मैं आपको दे सकती हूं पर आप खुद पढ़े तो ज्यादा अच्छा होगा।

कसप में सभी किरदारों का चित्रण बहुत अच्छे से किया गया है। नायक और नायिका के अलावा नायिका की माँ , बब्बी दी , गुड़िया , साबुली कैंचा , बब्बन ये सारे किरदार आपको हँसाने, रुलाने या सोचने पर मजबूर कर देंगे। इस किताब का अंत मुझे बड़ा अच्छा लगा। किताबों का अंत मेरे लिए कुछ ज्यादा ही रुचिकर होता है। कई बार ऐसी किताबें होती है जिनमे सब कुछ बहुत अच्छा होता है , लेकिन अगर मुझे किताब का अंत नहीं अच्छा लगा तो मजा थोड़ा किरकिरा सा हो जाता है , पर अगर अंत खूबसूरत हो तो एक संतुष्टि सी मिल जाती है। 

मेरे लिए ये किताब एक असफल प्रेम कहानी का चित्रण है और इसको पढ़ने के लिए आपको धैर्य की जरूरत पड़ेगी।कुमाऊनी भाषा , नायक का लाटापन , नायिका की बेबाक बोली , मध्यमवर्गीयता और सही समय पर दार्शनिकता , ये सब कसप को और खास बनाती है। अगर आप बहुत साहित्यिक किस्म के व्यक्ति है, लंबी चौड़ी कहानियाँ पढ़ने में जरा भी बोरियत नहीं होती और प्रेम कहानी के साथ – साथ आपको आपको दार्शनिकता पसंद है तो आपको ये किताब “कसप “ जरूर पढ़नी चाहिए।

कसप किताब क्यों पढ़े ?अगर आप बहुत साहित्यिक किस्म के व्यक्ति है, लंबी चौड़ी कहानियाँ पढ़ने में जरा भी बोरियत नहीं होती और प्रेम कहानी के साथ – साथ आपको आपको दार्शनिकता पसंद है तो आपको ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए।  कसप किताब क्यों न पढ़े ?अगर आप कुछ हल्का पढ़ना चाहते हो या आपको लम्बी कहानियों में कोई रूचि नहीं है या आपको दार्शनिकता पसंद नहीं है या आप वक़्त गुजारने के लिए कुछ पढ़ना चाहते हो तो ये किताब शायद आपको पसंद न आये।  कसप किताब के किरदार –किरदारों की बात करें तो सभी किरदार अपना काम बखूबी निभाएं है। कुछ किरदार आपको बहुत पसंद आने वाले है जो सही समय पर एकदम सही व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ बोलते हुए नजर आये है। नायक , नायिका के अलावा, नायिका की माँ, बबली दी , गुड़िया, साबुली कैंजा ये सब किरदार आपको हँसाने, रुलाने या सोचने पर मजबूर कर देने वाले है। कसप किताब की कुछ खास बातें –

  • किताब की भाषा शैली – कुमाउँनी 
  • नायक का लाटापन 
  • नायिका की बेबाक बोली 
  • मध्यमवर्गीयता 
  • वक़्त के अनुसार दार्शनिकता

कसप हिंदी किताब खरीदें

बाहुबली किताब की समीक्षा हिंदी में पढ़ें : बाहुबली पुस्तक समीक्षा

आप कसप किताब की समीक्षा यूट्यूब पर भी देख सकते है।

🛒 कहाँ से खरीदें और बेस्ट डील्स (Available Formats)

किताब के उपलब्ध एडिशन और उनकी ताज़ा कीमतें:

📖 Paperback Edition
₹199
In Stock on Amazon Buy Paperback →
📱 Kindle Edition
₹99
Instant Download Read on Kindle →

One response to “कसप : भावनाओं की गहराईयों में एक यात्रा”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कसप : भावनाओं…
₹199
Amazon पर खरीदें →